जामिया मिल्लिया इस्लामिया को मिली पहली महिला कुलपति
हाल ही में सालों से खाली पड़े केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपति के पदों की नियुक्ति राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने की है। इस मंजूरी के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया को उनकी पहली महिला कुलपति मिल गई हैं। पहली बार ऐसा हुआ है जब जामिया मिल्लिया इस्लामिया में किसी महिला को कुलपति बनाया गया है। प्रोफ़ेसर नजमा अख्तर जामिया इस्लामिया की पहली महिला कुलपति के रूप में राष्ट्रपति की मंजूरी की बात नियुक्त होगीं।
इसके अलावा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में मेरठ के प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा मोतिहारी विश्वविद्यालय और आईसीएचआर के मेंबर सेक्रेट्री और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रजनीश शुक्ला महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति के रूप में नियुक्त किया गया है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन तीनों विश्वविद्यालय के कुलपति के पिछले 1 वर्षों से खाली पड़े थे। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इन केंद्रीय विश्वविद्यालय के नए कुलपति के नियुक्त होने की सूचना भेज दी गई है। इन तीनों विश्वविद्यालयों में 5 वर्ष के लिए कुल पतियों की नियुक्ति को राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावित किया गया है।
पूरे देश भर में ऐसा पहली बार होगा जब जामिया मिलिया इस्लामिया की कमान सिर्फ दो महिलाओं के हाथों में होगी। इसके पहले भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने 2018 में मणिपुर कि राज्यपाल एवं पूर्व केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नजमा हेपतुल्ला को चांसलर नियुक्त किया था। केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विजिटर ने डॉक्टर नजमा अख्तर को जामिया का कुलपति नियुक्त किया है। देश के अन्य किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय के दोनों सर्वोच्च पदों पर महिलाएं नहीं हैं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया ऐसा पहला विश्वविद्यालय बना जिसके दोनों सर्वोच्च पद पर महिलाओं का आधिपत्य हैं।
प्रोफेसर डॉक्टर नजमा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पास आउट हैं। इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टॉरिकल रिसर्च के मेंबर सेक्रेटरी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रजनीश शुक्ला को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा का कुलपति नियुक्त किया गया है। इन्होंने इतिहास के क्षेत्र में कई शोध कार्य किए हैं।

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